इस मंदिर में ‘केसर बरसाते’ हैं महादेव… और पलभर में सोने-से चमक उठते हैं पहाड़!

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इस मंदिर में ‘केसर बरसाते’ हैं महादेव… और पलभर में सोने-से चमक उठते हैं पहाड़!

इस मंदिर में ‘केसर बरसाते’ हैं महादेव… और पलभर में सोने-से चमक उठते हैं पहाड़!

पश्चिमी राजस्थान की सरहदी धरती बाड़मेर आस्था, रहस्य और चमत्कारों की कहानियों से भरी पड़ी है. इन्हीं में से एक अनोखा और रोमांचकारी स्थल है डंडाली गांव की पहाड़ियों में स्थित गोयणेश्वर भाखर महादेव मंदिर जहां महाशिवरात्रि की रात एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिलता है जिसे श्रद्धालु “देवों का आशीर्वाद” मानते हैं.

पश्चिमी राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिले की वीरान पहाड़ियों के बीच बसा डंडाली गांव सालभर शांत रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि की रात यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है. जैसे ही रात गहराती है, गोयणेश्वर भाखर महादेव मंदिर के आसपास का वातावरण आस्था, रहस्य और दिव्यता से भर उठता है. स्थानीय लोग कहते हैं कि इस पावन रात को यहां एक ऐसा चमत्कार होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
महाशिवरात्रि की रात आसमान से बरसती है केसर

महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियों पर अचानक केसर जैसे पीले-नारंगी रंग के कण गिरते दिखाई देते हैं. यह दृश्य कुछ ही समय के लिए होता है, लेकिन उस पल को देखने वाले इसे जीवन का सबसे दिव्य अनुभव बताते हैं. लोग इसे भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं.

सदियों पुरानी आस्था आज भी कायम है विश्वास
गोयणेश्वर भाखर महादेव मंदिर वर्षों से स्थानीय लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है. महाशिवरात्रि के मौके पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और पूरी रात भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं. यह बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित है.
हर मान्यता होती है पूरी
महाशिवरात्रि के दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो जाता है. भक्त जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं. रात होते-होते पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से गूंज उठता है. गोयणेश्वर भाखर महादेव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां दूर-दूर के गांवों और जिलों से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है.
सोने सा चमक उठते हैं पहाड़
इतना ही नहीं मंदिर के आसपास की पहाड़ियां महाशिवरात्रि की रात एक पल के लिए सोने जैसी चमकने लगती हैं. जैसे ही चंद्रमा की रोशनी और वातावरण में मौजूद खास कण पहाड़ियों पर पड़ते हैं पूरा क्षेत्र स्वर्णिम आभा से जगमगा उठता है.

 

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News Desk