गलत आदमी से दोस्ती के चक्कर में फंसे ब्रिटेन के पीएम स्टार्मर, अब कुर्सी पर मंडराया संकट

0
4

लंदन। यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े नए सनसनीखेज खुलासों ने ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। हालांकि प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर का एप्स्टीन से कभी कोई सीधा व्यक्तिगत संबंध नहीं रहा, लेकिन अपनी सरकार में एप्स्टीन के करीबी रहे पीटर मैंडलसन की नियुक्ति को लेकर वे अब चौतरफा घिर गए हैं। ताजा दस्तावेजों में मैंडलसन और एप्स्टीन के बीच गहरी दोस्ती की बात सामने आने के बाद स्टार्मर की मध्यमार्गी-वामपंथी सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
यह संकट तब गहराया जब स्टार्मर को एप्स्टीन के अपराधों के पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि मैंडलसन ने अपनी दोस्ती को लेकर उनसे लगातार झूठ बोला और वे उस झूठ को पहचान नहीं सके। स्टार्मर ने भावुक अपील करते हुए कहा, मैं उन पीड़ितों से माफी मांगता हूँ जिन्होंने ताकतवर लोगों के हाथों उत्पीड़न सहा। मुझे खेद है कि मैंने मैंडलसन के दावों पर यकीन किया और उन्हें महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया। प्रधानमंत्री की इस माफी को उनकी राजनीतिक कमजोरी और खराब निर्णय क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।
विवाद की जड़ में पीटर मैंडलसन की वह नियुक्ति है, जिसे स्टार्मर ने लेबर पार्टी के अंदरूनी विरोध के बावजूद आगे बढ़ाया था। हाल ही में सार्वजनिक हुई एप्स्टीन फाइल्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मैंडलसन और एप्स्टीन के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि काफी करीबी थे। इस खुलासे के बाद स्टार्मर ने मैंडलसन को पद से तो हटा दिया है, लेकिन अब पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ बगावत के सुर तेज हो गए हैं। लेबर पार्टी की सांसद पाउला बार्कर ने खुले तौर पर कहा है कि प्रधानमंत्री का निर्णय संदिग्ध था और अब उन्हें जनता के साथ-साथ अपनी पार्टी का विश्वास फिर से जीतने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण स्टार्मर की प्रतिष्ठा के लिए एक मृत्यु दंड जैसा साबित हो सकता है। जानकारों के अनुसार, भले ही सरकार अभी न गिरे, लेकिन स्टार्मर की साख को जो ठेस पहुँची है, उससे उबरना नामुमकिन लग रहा है। प्रोफेसर रॉब फोर्ड जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी सरकार की उम्र अब महीनों या शायद कुछ ही सालों की बची है। ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू के बाद अब मैंडलसन और स्टार्मर का नाम इस विवाद से जुड़ने के कारण यह मामला केवल एक कूटनीतिक चूक न रहकर एक बड़ा नैतिक संकट बन गया है। आने वाले दिन तय करेंगे कि स्टार्मर अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या एप्स्टीन का काला साया उनकी सरकार को निगल जाएगा।

Previous articleBHU में यौन उत्पीड़न मामला, आरोपी छात्र का PhD पंजीकरण रद्द
Next articleजम्मू-कश्मीर को आधुनिक, प्रगतिशील और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
News Desk