पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को जानकारी दी कि अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में 216 विद्रोही मारे गए हैं। हालांकि, कई दिनों तक चले इस खूनी संघर्ष में 36 आम नागरिकों और सेना के 22 जवानों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। सेना की मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान दावा किया कि 26 जनवरी को शुरू किया गया ‘रद-उल-फितना-1’ नाम का यह ऑपरेशन अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
क्या बोली पाकिस्तानी सेना?
सेना ने बताया कि पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में विद्रोहियों के छिपे होने की पक्की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने वहां कार्रवाई शुरू की। सेना ने विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला बोला, जिसमें शुरुआत में 41 विद्रोही मारे गए। बाद में सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई और सफाई अभियान के दौरान कुल 216 विद्रोहियों को मार गिराया गया। सेना का दावा है कि इस कार्रवाई से विद्रोही नेटवर्क के नेतृत्व, उनके कमांड स्ट्रक्चर और काम करने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
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रेलवे हुआ बहाल
इस बीच, पाकिस्तान रेलवे के प्रवक्ता मुहम्मद काशिफ ने बताया कि पांच दिनों तक बंद रहने के बाद बलूचिस्तान में रेल सेवा फिर से बहाल कर दी गई है। हमलों के दौरान कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा था, जिससे सुरक्षा कारणों से क्वेटा से ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई थी। अब मरम्मत के बाद यातायात सामान्य हो रहा है।
असेंबली में पास हुए प्रस्ताव
उधर, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया। इसमें सरकार से मांग की गई कि वह विद्रोही और उसे मदद देने वालों के खिलाफ एक सख्त और आक्रामक राष्ट्रीय रणनीति अपनाए। गौरतलब है कि ईरान और अफगानिस्तान सीमा से सटा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा का केंद्र रहा है। यहां बलूच विद्रोही अक्सर 60 अरब डॉलर वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सी-पैक) प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाते हैं। मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 31 लोगों की मौत हुई थी और 300 से ज्यादा यात्री बंधक बनाए गए थे।
