Indian Nobel Prize Winners In Hindi – 10 भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता

Indian Nobel Prize Winners In Hindi – 10 भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता:

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। यह पुरस्कार विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोगों को उनके किए गए अद्भुत कामों के बदलौत मिलता है। यह पुरस्कार के शुरवात सन 1901 में वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के याद में किया गए।

यह पुरस्कार भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry), चिकित्सा विज्ञान (Physiology or Medicine), साहित्य (Literature) और शांति (Peace) जैसे क्षेत्र में सर्वोकृष्ट काम करने वाले लोगों को मिलता है। यह नोबेल प्राइज साल में एक बार दिया जाता है।

यह पुरस्कार प्रशस्ति-पत्र के साथ 10 लाख डालर की राशि के रूप में दिया जाता है। अल्फ्रेड नोबेल कुल 355 अविष्कार किए जिनमें 1867 में किया गया डायनामाइट अविष्कार भी शामिल है। अल्फ्रेड नोबेल को डायनामाइट जैसे विज्ञान के विध्वंसक अविष्कारों की बखूबी समझ थी।

अल्फ्रेड नोबेल हमेशा विकास के लिए नए संसाधन की खोज में रहते थे। दिसंबर 1896 में अल्फ्रेड नोबेल ने अपने संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होने एक ट्रस्ट के नाम सुरक्षित रख दिए।

History Of Nobel Prize In Hindi

अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्वीडन देश में हुआ था। अल्फ्रेड नोबेल एक समृद्ध अभियंता परिवार से थे। 1894 में अल्फ्रेड नोबेल ने बेफोर्स आयरन और स्टील मील ख़रीदा जिसे उन्होंने एक महत्वपूर्ण हथियार निर्माता का केंद्र बनाया। और वहा से अल्फ्रेड नोबेल ने अपने बैल्लेस्टिक मिसाइलो का भी सफल परीक्षण किया था।

अल्फ्रेड नोबेल कुल 355 अविष्कार किए जिनमें 1867 में किया गया डायनामाइट अविष्कार भी शामिल है। वे हमेशा से विज्ञान के विकास के लिए नए संशाधन की खोज में रहते थे।

दिसंबर 1896 में अपने मृत्यु के पूर्व अपने विशाल संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रखा था। बाद में वह ट्रस्ट का नाम नोबेल फाउंडेशन पड़ा था।

नोबेल फाउंडेशन का प्रारंभ 29 जून 1900 में हुआ था। उसका उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों का आर्थिक रूप से संचालन करना है। अल्फ्रेड नोबेल की यह इच्छा थी की इन पैसे के ब्याज से उन लोगों को सन्मानित किया जाए जो लोग मानव के लिए विभिन्न क्षेत्र सबसे कल्याणकारी काम करें।

स्वीडिश बैंक में जमा पैसे के ब्याज से नोबेल फाउंडेशन द्वारा हर साल शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगो को यह पुरस्कार से सन्मानित किया जाता है।

नोबेल फाउंडेशन कुल 5 लोगों की टीम है जो सारे नोबेल विजेता को पुरस्कार देने का आयोजन करता है। इस टीम का मुखिया स्वीडन के किंग ऑफ़ काउन्सिल द्वारा तय किया जाता है। और बाकि अन्य 4 सदस्य पुरस्कार वितरण ट्रस्ट द्वारा तय किए जाते है।

नोबेल फाउंडेशन के स्थापना के तुरंत बाद 1901 से नोबेल पुरस्कार की शुरुवात हुए। परन्तु अर्थशास्र के नोबल पुरस्कार की शुरुवात 1968 से की गयी थी। पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस संस्था के संस्थापक हेनरी ड्युनेंट और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक फ्रेडरिक पैसी को सयुंक्त रूप में सन्मानित किया गए।

History Of Indian Nobel Prize Winners In Hindi

संपूर्ण विश्व में भारतीयों ने होनी अमिट छाप छोड़ी है। कही भारतीयों ने अपने अपने क्षेत्र में सर्वोकृष्ट काम करके नोबेल प्राइज को जीता है।

परंतु एक अफ़सोस हर भारतीय को है जो अहिंसा के बदौलत भारत को आजादी दिलाने वाले में सबसे बड़ा नाम महात्मा गांधी जी को कभी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।

हालांकि उनके नाम को पांच बार नामांकन मिला था और दो बार उनके नाम का चयन भी हुआ था। परंतु हर बार चयन समितियों ने विभिन्न कारण बताकर उन्हें पुरस्कार नहीं दिए।

गांधी जी को नोबेल पुरस्कार न देने के पीछे कही कारण चयन समितियों ने बताए। उसमे एक सबसे बड़ा कारण यह था के वे अत्यधिक राष्ट्रवादी थे। परंतु ऐसे अनेक भारतीय है जिन्होंने अपने क्षेत्र में सर्वोकृष्ट काम करके नोबेल पुरस्कार हासिल किया है।

हम इस लेख में ऐसे भारतीय लोगों के बारेमें जानने की कोशिश करेंगे जिन्होंने अपने क्षेत्र में बड़ा काम करके अपने देश के लिए विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार हासिल किए है।

Indian Nobel Prize Winners List In Hindi

वर्ष प्राप्तकर्ता का नाम कार्यक्षेत्र
1913 रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य (Literature)
1930 सर चंद्रशेखर वेंकटरमन भौतिकी (Physics)
1968 हरगोबिंद खुराना चिकित्सा (Medical)
1979 मदर टेरेसा शांति (Peace)
1983 डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर भौतिकी (Physics)
1998 अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र (Economics)
2001 वी.एस नायपॉल साहित्य (Literature)
2009 वेंकटरमन रामाकृष्ण रसायन (Chemistry)
2014 कैलाश सत्यार्थी शांति (Peace)
2019 अभिजीत बनर्जी अर्थशास्त्र (Economics)

Indian Nobel Prize Winners In Hindi

1. रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)

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Indian Nobel Prize Winners In Hindi

रवींद्रनाथ टैगोर भारत एवं एशिया के पहले व्यक्ति (First Indian Nobel Prize Winner) थे जिन्हे नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। गुरुदेव के नाम से प्रसिद्ध रवींद्रनाथ टैगोर जी का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। वह एक कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार थे।

1913 में उनका काव्य पुस्तक ‘गीतांजलि’ (Gitanjali) के लिए साहित्य (Literature) का नोबेल पुरस्कार से सन्मानित किया गया था। रवींद्रनाथ टैगोर जी ने महज 8 वर्ष आयु से कविता लिखना शुर कर दी थी। रवींद्रनाथ टैगोर जी ने कही सारे प्रेम गीत लिखे थे। गीतांजलि (Gitanjali) और साधना (Sadhana) उनके महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध कार्यों में से एक है।

रवींद्रनाथ टैगोर जी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत और बांग्लादेश यह दोन देशो के लिए राष्ट्रगान लिखे थे। 1901 में उन्होंने प्रसिद्ध ‘शांतिनिकेतन’ की स्थापना की थी। बाद में शांतिनिकेतन को ‘विश्वभारती’ विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाने लगा।

2. सर चंद्रशेखर वेंकटरमन ( Chandrasekhara Venkata Raman)

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भारत के पहले भौतिकी शास्त्र (Physics) में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय सर चंद्रशेखर वेंकटरमन थे। सर चंद्रशेखर वेंकटरमन जी को 1930 में भौतिकी शास्त्र में यह सन्मान मिला था। सर चंद्रशेखर वेंकटरमन जी को सी.वी रमन (C.V.Raman) के नाम से भी जानते है।

सी.वी रमन (C.V.Raman) जी भौतिकी शास्त्र में महान वैज्ञानिक थे। सी.वी रमन जी का जन्म तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के पास थिरुवणिक्कवल में हुआ था। सी.वी रमन जी ने चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज में पढ़ाई ख़त्म की थी। फिर बाद में, उन्होंने कोलकाता के विश्वविद्यालय में भौतिकी (Physics) के प्रोफेसर के रूप में कार्य किया था।

सर सी.वी रमन कई सन्मान और पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता थे। जिनमे उन्हें ‘सर’ की उपाधि भी प्राप्त थी।

सर सी.वी रमन जी ने अपने अनुसंधान में इस बात का पता लगाया कि जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तब उसकी वेवलैंथ (तरंग की लम्बाई) में बदलाव आता है। इसी को रमन इफ़ेक्ट (Raman Effect) के नाम से जाना जाने लगा।

1928 में खोजे गए उनके सिद्धांत में पारदर्शी माध्यम से गुजरने वाले प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव को बताया गया था। यह उनके द्वारा किए गए खोज से उन्हें एक महत्वपूर्ण प्रकाशिकी अनुसंधान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था।

3. हरगोबिंद खुराना (Hargobind Khorana)

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हरगोबिंद खुराना को 1968 में चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हरगोबिंद खुराना भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक है। डॉ खुराना का जन्म पंजाब राज्य के रायपुर (अब पाकिस्तान) में हुआ था।

उन्होंने लिवरपूल विश्वविद्यालय (Liverpool University) से रसायन विज्ञान (Chemistry) में डॉक्टरेट की डिग्री ली थी। बाद में वे 1960 संकाय प्राध्यापक के रूप में विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय (University of Wisconsin) में शामिल हुए थे।

मेडिसिन के क्षेत्र में उनकी प्रमुख सफलता तथा आनुवांशिक कोड (DNA) और प्रोटीन संश्लेषण में इसके कार्य का विश्लेषण करने के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गए।

4. मदर टेरेसा (Mother Teresa)

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मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार प्रधान किया गया था। मदर टेरेसा का जन्म अल्बानिया देश में हुआ था। वह 1928 में आयरलैंड के डबलिन (Dublin) शहर की संस्था सिस्टर्स ऑफ लोरेटो में शामिल हुईं थी। और 1929 में एक मिशनरी के रूप में केवल परित्यक्त और निराश्रितों के दुख का पता लगाने के लिए कोलकाता आईं थी।

गरीबों और बीमारों के लिए चिंता ने उन्हें एक नई मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के लिए प्रेरित किया था। इसलिए उन्होने 45 सालों तक गरीब, असहाय और मरीजों की सेवा की थी। भारतीय नागरिक बनने के बाद, मदर टेरेसा ने बेसहारा, कुष्ठरोगियों के सेवा करके वे नोबल पुरस्कार का कारण बनी थी।

उनकी यह निस्वार्थ भाव से सेवा और अद्वितीय भक्ति, न केवल असहाय भारतीयों के लिए, बल्कि विश्व शांति के लिए भी कारण बना और इसलिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और यह भारत को पहला नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।

5. डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (Dr Subrahmanyan Chandrasekhar)

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डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी शास्त्र (Physics) में महत्वपूर्ण योगदान के तहत नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ एस चंद्रशेखर ने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज से अपनी पढाई खत्म की थी। वह नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के भतीजे थे।

बाद में डॉ एस चंद्रशेखर अमेरिका चले गए और वहा के नागरिक बन गए। वहा उन्होंने एस्ट्रोफिज़िक्स (Astrophysics) और स्टेलर डायनेमिक्स (Stellar Dynamics) पर कई किताबें लिखीं थी।

उन्होंने सफेद बौने सितारों (white dwarf stars) पर एक सिद्धांत विकसित किया जो बौने सितारों के द्रव्यमान की एक सीमा को पोस्ट करता है जिसे चंद्रशेखर सीमा (Chandrashekhar Limit) के रूप में भी जाना जाता है। उनका यह सिद्धांत तारकीय विकास (stellar evolution) के अंतिम चरणों की व्याख्या करता है।

6. अमर्त्य सेन (Amartya Sen)

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प्रो अमर्त्य सेन वर्ष 1998 के लिए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के प्राप्तकर्ता थे। वे इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले एशियाई एवं भारतीय बने। शांतिनिकेतन में जन्मे इस विद्वान अर्थशास्त्री जो अर्थशास्त्र में अग्रणी है। उनके कल्याण और विकास के पहलुओं पर कई पुस्तकों और पत्रों में उन्हें श्रेय दिया गया है।

प्रो सेन मानवतावादी हैं और उन्होंने अकाल, गरीबी, लोकतंत्र, लिंग और सामाजिक मुद्दों पर अपने उत्कृष्ट लेखन से खुद को प्रतिष्ठित भी किया है।

केनेथ एरो द्वारा पूर्व में सुझाई गई ‘असंभवता प्रमेय’ (impossibility theorem) में कहा गया है कि व्यक्तिगत विकल्पों को समग्र रूप से समाज के लिए एक संतोषजनक विकल्प बनाना संभव नहीं था। परंतु प्रो सेन ने गणितीय रूप से दिखाया कि समाजों को इस तरह की खराब स्थिति को कम करने के तरीके मिल सकते हैं।

उन्होंने 1974 में बांग्लादेश में पड़े अकाल पर भी लिखा है। इसके साथ उन्होंने अकाल में भोजन व्यवस्था के लिए अपनी थ्योरी दी है। पिछले 40 साल से 30 से अधिक विभिन्न भाषा में उनके किताबें छपी है।

7. विद्याधर सूरजप्रसाद नैपाल (V.S Naipaul)

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सर विद्याधर सूरजप्रसाद नैपाल को सबसे जादा वि एस नैपाल से जाना जाता है। वी. एस. नैपाल को 2001 में साहित्य (Literature) के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उन्हें 1989 में ट्रिनिटी क्रॉस, त्रिनिदाद और टोबैगो के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 1990 में ब्रिटेन में नाइटहुड प्राप्त किया था। उनका सफल उपन्यास 1961 में “ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास” प्रकाशित हुआ था।

वि एस नैपाल त्रिनिदाद और टोबैगो में जन्मे ब्रिटिश लेखक थे, जो अंग्रेजी में फिक्शन और नॉनफिक्शन के काम करते थे।उन्हें त्रिनिदाद में स्थापित उनके कॉमिक शुरुआती उपन्यासों के लिए जाना जाता है। जो व्यापक दुनिया में अलगाव के उनके धूमिल उपन्यास, और जीवन और यात्रा के उनके सतर्क कालक्रम हैं।

1880 के दशक में, उनके दादा दादी भारत से त्रिनिदाद के बागानों में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में काम करने के लिए चले गए थे। त्रिनिदाद में भारतीय आप्रवासी समुदाय में, नायपॉल के पिता एक अंग्रेजी भाषा के पत्रकार बने।

8. वेंकटरमण रामकृष्णन (Venkatraman Ramakrishnan)

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भौतिक विज्ञान (Physics) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद, वेंकटरमन रामकृष्णन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो में आणविक जीव विज्ञान (molecular biology) का अध्ययन शुरू किया।

वेंकटरमण रामकृष्णन को इस क्षेत्र में उनके काम के लिए 2009 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने पुरस्कार अपने दो शोध साथियों (अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस ए. स्टेट्ज और इस्राएल की अदा ई.योनथ) के साथ साझा किया था।

वर्षों के अध्ययन के बाद, उन्होंने राइबोसोमल (ribosomal) यूनिट के आरएनए संरचना (RNA Structure) पर ग्राउंडब्रेकिंग वैज्ञानिक पत्रों (scientific papers) की एक श्रृंखला प्रकाशित की थी। इन्होने यह सभी कार्यप्रणाली को थ्रीडी (3D) तकनीक के ज़रिए समझाया कि किस तरह रिबोसोम्ज़ अलग-अलग रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

वेंकटरमण रामकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के चिदंबरम में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों वैज्ञानिक थे और उनकी प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु और गुजरात में हुए थी।

9. कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi)

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क्या आपने “बचपन बचाओ आंदोलन” के बारे में कभी सुना है? यह आंदोलन कैलाश सत्यार्थी जी ने शुरू किया था। कैलाश सत्यार्थी द्वारा शुरू किया गया यह एनजीओ, बाल श्रम को मूल से समाप्त करने के लिए काम करता है।

कैलाश सत्यार्थी जी को बाल श्रम और बाल तस्करी उन्मूलन की दिशा में उनके अद्भुत काम के लिए 2015 में प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। पुरस्कार दिया गया था। आज तक उन्होंने 88,000 से भी अधिक बच्चों को बाल श्रम और गुलामी से मुक्त कराया है।

कैलाश सत्यार्थी 2014 में भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल हुए। उन्हें पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से प्रतिष्ठित शांति का नोबेल पुरस्कार प्रधान किया गए।

10. अभिजीत विनायक बनर्जी (Abhijit Banerjee)

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अभिजीत विनायक बनर्जी भारतीय मूल के एक अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं। जो वर्तमान में अमेरिकी फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।

अभिजीत बनर्जी को 2019 में “वैश्विक गरीबी उन्मूलन” के लिए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए आर्थिक विज्ञान (Economic Sciences) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें उनकी पत्नी एस्थर डफ़्लो और माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप में मिला है।

अभिजीत बनर्जी “अब्दुल लतीफ जमील गरीबी एक्शन लैब” के सह-संस्थापक भी है। वह इनोवेशन फॉर पॉवर्टी एक्शन के अनुसंधान सहयोगी और कंसोर्टियम ऑन फाइनेंशियल सिस्टम्स एंड पॉवर्टी के भी सदस्य है।

Sawaal Jawaab

Mother teresa ko nobel puraskar kab mila?

मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार प्रधान किया गया था।

who is the first nobel prize winner in india ?

रवींद्रनाथ टैगोर भारत एवं एशिया के पहले व्यक्ति (First Indian Nobel Prize Winner) थे जिन्हे नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

Nobel prize kaise milta hai ?

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। यह पुरस्कार विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोगों को उनके किए गए अद्भुत कामों के बदलौत मिलता है।

Nobel puraskar kya hai?

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। यह पुरस्कार विश्व के सर्वश्रेष्ठ लोगों को उनके किए गए अद्भुत कामों के बदलौत मिलता है। यह पुरस्कार प्रशस्ति-पत्र के साथ 10 लाख डालर की राशि के रूप में दिया जाता है।

दोस्तो हम उम्मीद करते है के Indian Nobel Prize Winners In Hindi – 10 भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अच्छी तरह से समज आ गया होगा। आप ऊपर दिए हुए Indian Nobel Prize Winners In Hindi के बारेमें जानकारी प्राप्त कर सकते है

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