Alankar in Hindi / अलंकार – अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण – हिंदी व्याकरण

alankar in hindi | alankar in hindi grammar | Types Of Alankar In Hindi | Shabdalankar In Hindi | Shabdalankar Ke Bhed In Hindi | Anupras Alankar In Hindi | Anupras Alankar Ke Udaharan | Yamak Alankar In Hindi | Yamak Alankar Ke Udaharan In Hindi | Punrukti Alankar In Hindi| Vipsa Alankar In Hindi | Vakrokti Alankar In Hindi | Slesh Alankar In Hindi | Arthalankar In Hindi | Upma Alankar In Hindi | Rupak Alankar In Hindi | Utpreksha Alankar In Hindi | Bhrantiman Alankar In Hindi | Ubhaya Alankar In Hindi
Alankar In Hindi

Alankar in Hindi / अलंकार – अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण – हिंदी व्याकरण:

Contents hide
4 शब्दालंकार के भेद / Shabdalankar Ke Bhed In Hindi
6 अर्थालंकार के भेद / Arthalankar Ke Bhed In Hindi

अलंकार की परिभाषा / Definition Of Alankar In Hindi

अलंकार शब्द का अर्थ ‘आभूषण’ होता है। अलंकार शब्द ‘अलम्+कार’ यह दो शब्द को जोड़कर बना है। जिसमे ‘अलम्’ शब्द का अर्थ ‘भूषण’ होता है। जिस प्रकार अलंकार स्री के सौंदर्य को बढ़ाता है। उसी प्रकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्द को अलंकार कहते है।

अलंकार से काव्य में रोचकता और सुंदरता उभरकर आती है। अलंकार को काव्य की आत्मा भी कहा जाता है। अलंकार काव्य के साथ जुड़कर उसकी सुन्दरता को दुगनी कर देता है।

अलंकार को संक्षेप में कहा जाए तो यह भाषा को सुंदर शब्दार्थ से सुज्जित करता है। यह भाषा और काव्य के रूप को सुंदर और मधुर बना देता है।

संस्कृत भाषा में ‘अलंकरोति इति अलंकारः’ कहा है। जिसका अर्थ जो अलंकृत करता है उसे अलंकार कहते है। भारतीय साहित्य के अनुसार किसी भी भाषा में अनुप्रास, उपमा, रूपक, अनन्वय, यमक, श्लेष, उत्प्रेक्षा, संदेह, अतिशयोक्ति, वक्रोक्ति आदि प्रमुख और इनके अलावा अन्य अलंकार भी है।

काव्य में कथनीय वस्तू को अच्छे रूप में अभिव्यक्ति देने के लिए अलंकार का उपयोग होता है। काव्य में अलंकार का विचार गुण, रस, ध्वनि, प्रसंग को ध्यान में रखकर किया जाता है।

अलंकार के भेद / Types Of Alankar In Hindi

अलंकार के मुख्यतः तीन भेद होते है।

  1. शब्दालंकार
  2. अर्थालंकार
  3. उभयलंकार

हमारे पाठ्यक्रम नुसार हमें शब्दालंकार और अर्थालंकार का अध्ययन किया जाता है।

शब्दालंकार / Shabdalankar In Hindi

जिस अलंकार में शब्दों का उपयोग करके काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है उसे ‘शब्दालंकार’ कहते है। और उन शब्दो पर समानर्थी शब्द रखा जाए तो यह चमत्कार समाप्त हो जाता है।

शब्दालंकार मुख्यतः दो शब्दों से बनता है-‘शब्द+अलंकार’ उसके दो रूप होते है ‘ध्वनी और अर्थ’ उसका अर्थ किसी काव्य को शब्दों के माध्यम से अलंकृत करना होता है। इस अलंकार में कविता और काव्य में शब्दों के आधार पर वर्णन किया जाता है।

शब्दालंकार के भेद / Shabdalankar Ke Bhed In Hindi

  1. अनुप्रास अलंकार
  2. यमक अलंकार
  3. पुनरुक्ति अलंकार
  4. विप्सा अलंकार
  5. वक्रोक्ति अलंकार
  6. श्लेष अलंकार

1. अनुप्रास अलंकार / Anupras Alankar In Hindi

अनुप्रास शब्द दो शब्दों को जोड़कर बनता है। ‘अनु+प्रास’ जिसमे ‘अनु’ का अर्थ बार-बार और ‘प्रास’ का अर्थ वर्ण (व्यंजन) होता है। जब किसी काव्य में वर्ण की बार-बार आवृत्ति होती है जिससे उस काव्य की शोभा बढ़ जाती है उसे ‘अनुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

अनुप्रास अलंकार के उदाहरण / Anupras Alankar Ke Udaharan

कर कानन कुंडल मोर पखा,
उर पे बनमाल बिराजति है।

इस काव्य में ‘क’ वर्ण का 3 बार और ‘व’ वर्ण का 2 बार इस्तेमाल किया है। जिसके कारण इस काव्य में अवश्य अनुप्रास अलंकार होगा।

अनुप्रास अलंकार के उपभेद / Anupras Alankar Ke Bhed

  1. छेकानुप्रास अलंकार
  2. वृत्यानुप्रास अलंकार
  3. लाटानुप्रास अलंकार
  4. अन्त्यानुप्रास अलंकार
  5. श्रुत्यानुप्रास अलंकार

1. छेकानुप्रास अलंकार / Chekanupras Alankar

‘छेक’ का अर्थ होता है ‘वाक’ यानि चातुर्य। जहा एक और एक से अधिक वर्ण की एक कर्म में आवृत्ति होती है उस ‘छेकानुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

इस करुणा कलित हृदय में,
क्यों विकल रागिनी बजती है।

इस काव्य में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति एक क्रम में एक बार है। जिस कारण यह काव्य में अवश्य छेकानुप्रास अलंकार होगा।

2. वृत्यानुप्रास अलंकार / Vrityanupras Alankar

जिस काव्य में एक या एक से अधिक व्यंजनों की आवृत्ति अनेक बार होती है उसे ‘वृत्यानुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि,
कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।

इस काव्य में ‘न’ वर्ण की की आवृत्ति एक से अधिक बार है। जिस कारण यह काव्य में अवश्य वृत्यानुप्रास अलंकार होगा।

3. लाटानुप्रास अलंकार / Latanupras Alankar

लाट का अर्थ होता है समहू। जिस काव्य में सामनार्थी शब्दों की आवृत्ति होती है। परंतु काव्य के दो पंक्तियों में अंतर होता है उसे ‘लाटानुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

“पूत सपूत तो का धन संचय,
पूत कपूत तो का धन संचय।”

इस काव्य में प्रथम और द्वितीय पंक्ति में समान शब्द का उपयोग किया गया है। परंतु दोनों पंक्तियों का अर्थ अलग अलग है। जिस कारण यह काव्य में अवश्य लाटानुप्रास अलंकार होगा।

4. अन्त्यानुप्रास अलंकार / Antyanupras Alankar

जिस काव्य में पद के अंत के एक वर्ण और एक स्वर की साम्यमूलक आवृत्ति होती है उसे ‘अन्त्यानुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

तुझे देखा तो यह जाना सनम,
प्यार होता है दीवाना सनम।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।

5. श्रुत्यानुप्रास अलंकार / Shrutianupras Alankar

मुख के उच्चारण स्थान से संबंधित कानों को मधुर लगने वाले वर्ण के साम्य यानि भेद की आवृत्ति होती है उसे ‘श्रुत्यानुप्रास अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

तेही निसि सीता पहुँ जाई,
त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।

2. यमक अलंकार / Yamak Alankar In Hindi

जब किसी काव्य में एक शब्द दो और दो से अधिक बार आता है। और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है उसे ‘यमक अलंकार’ कहा जाता है।

जहा शब्दों की आवृत्ति होती है और अर्थ भिन्न-भिन्न होता है वहा यमक अलंकार अवश्य आता है। जिस काव्य में एक शब्द और शब्द समूह एक और एक से अधिक बार आये और हर बार उसका अर्थ अलग होता है वह यमक अलंकार होता है।

यमक अलंकार के उदाहरण / Yamak Alankar Ke Udaharan In Hindi

कहै कवि बेनी, बेनी व्याल की चुराई लीनी।
रति रति सोभा सब रति के शरीर की।

इस काव्य में पहले पंक्ति में बेनी शब्द की आवृत्ति दो बार है। जिसमे पहला शब्द ‘बेनी’ कवि का नाम है और दूसरा शब्द ‘बेनी’ का अर्थ चोटी होता है। और दूसरी पंक्ति में रति शब्द का तीन बार आवृत्ति है। उसमे पहला रति का अर्थ रत्ती समीप और दूसरा रति का अर्थ कामदेव के सुंदर पत्नी का नाम होता है।

कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाए बौराए जग, या पाए बौराय।

इस काव्य में ‘कनक’ शब्द का दो बार आवृत्ति है। जसमे पहला शब्द का अर्थ धतूरा और दूसरा शब्द का अर्थ सोना होता है।

3. पुनरुक्ति अलंकार / Punrukti Alankar In Hindi

जब कोही शब्द दो बार दोराहया जाए उसे ‘पुनरुक्ति अलंकार’ कहते है। पुनरुक्ति शब्द दो शब्द को जोड़कर बनता है “पुनः+उक्ति”

पुनरुक्ति अलंकार के उदाहरण / Punrukti Alankar Ke Udaharan

  1. मधुर-मधुर मेरे दीपक जल।
  2. जुगन- जुगन समझावत हारा , कहा न मानत कोई रे ।
  3. लहरों के घूँघट से झुक-झुक , दशमी शशि निज तिर्यक मुख ,दिखलाता , मुग्धा- सा रुक-रुक ।
  4. बढ़त पल-पल घटत छिन-छिन चलत न लगे बार।

4. विप्सा अलंकार / Vipsa Alankar In Hindi

जब किसी काव्य और कथन में किसी शब्द की आदर, घबराहट, घृणा, रोचकता आदि के साथ एक से अधिक बार आवृत्ति होती है उसे ‘विप्सा अलंकार’ कहते है।

5. वक्रोक्ति अलंकार / Vakrokti Alankar In Hindi

जहा वक्ता द्वारा कथित शब्दों का अभिप्रेत अर्थ ग्रहण न करके श्रोता अन्य काल्पनिक अर्थ निकलकर कल्पना कर लेता है उसे ‘वक्रोक्ति अलंकार’ कहते है।

वक्रोक्ति अलंकार के उपभेद / Vakrokti Alankar Ke Bhed

  1. काकु वक्रोक्ति अलंकार
  2. श्लेष वक्रोक्ति अलंकार

1. काकु वक्रोक्ति अलंकार

जब वक्ता द्वारा बोले गए शब्द का उसके कंठ के ध्वनि को श्रोता अलग अर्थ निकले उसे ‘काकु वक्रोक्ति अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावण तोहि समान कोउ नाहीं।
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत परतिय चोरी।।

2. श्लेष वक्रोक्ति अलंकार

जहा श्लेष यानि श्रोता की वजह से वक्ता द्वारा बोले गए शब्द अलग अर्थ निकला जाता है उसे ‘श्लेष वक्रोक्ति अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

एक कबूतर देख हाथ में पूछा, कहाँ अपर है ?
उसने कहा, अपर कैसा ? वह तो उड़ गया सपर है।

6. श्लेष अलंकार / Slesh Alankar In Hindi

जिस काव्य में एक शब्द एक ही बार आए और उसका अर्थ अलग अलग निकले उसे ‘श्लेष अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

रहिमन पानी राखिये,बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरै, मोती मानुष चून।

इस काव्य में पानी शब्द के तीन अर्थ है।

1.चमक
2.सम्मान
3.चून

अर्थालंकार / Arthalankar In Hindi

जिस काव्य में अर्थ के माध्यम से चमत्कार होता है उसे ‘अर्थालंकार’ कहा जाता है।

अर्थालंकार के भेद / Arthalankar Ke Bhed In Hindi

  1. उपमा अलंकार
  2. रूपक अलंकार
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार
  4. भ्रांतिमान अलंकार
  5. संदेह अलंकार
  6. अन्योक्ति अलंकार
  7. विभावना अलंकार
  8. मानवीकरण अलंकार
  9. अतिशयोक्ति अलंकार

1. उपमा अलंकार / Upma Alankar In Hindi

जब काव्य की पंक्ति में दो वस्तुओ के बिच समानता होने के कारण उनकी तुलना की जाती है उसे ‘उपमा अलंकार’ कहा जाता है।

उपमा अलंकार के चार भिन्न अंग होते है। जो उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, और साधारण धर्म होता है।

उपमेय: जिसका वर्णन किया जाए अर्थात जिसको उपमा दिए जाए उसे उपमेय कहा जाता है। किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु की उपमा दी जाए। जैसे की उसका मुख चन्द्रमा समान सुन्दर है। इस वाक्य में मुख को चन्द्रमा की उपमा दी गए है। जिसमे मुख उपमेय है।

उपमान: उपमेय की उपमा जिसे दिए जाए उसे उपमान कहा जाता है। उपमेय को उपमान साथ तुलना की जाती है। जैसे की जैसे की उसका मुख (उपमेय) चन्द्रमा समान सुन्दर है। जिसमे चन्द्रमा उपमान है।

साधारण धर्म: जब दो वस्तुओ के बिच समानता दिखाने के लिए जिस गुण या धर्म का उपयोग होता है उसे साधारण धर्म कहा जाता है। जैसे की उसका मुख (उपमेय) चन्द्रमा (उपमान) समान सुन्दर है। जिसमे सुन्दर साधारण धर्म है।

वाचक शब्द: जब उपमेय और उपमान में समानता दिखाने के लिए जिस शब्द का उपयोग होता है उसे वाचक शब्द कहा जाता है। जैसे की उसका मुख (उपमेय) चन्द्रमा (उपमान) समान सुन्दर(साधारण धर्म) है। जिसमे समान शब्द वाचक शब्द है।

उपमा अलंकार के उपभेद / Upma Alankar Ke Bhed

  1. पूर्णोपमा अलंकार
  2. लुप्तोपमा अलंकार

1. पूर्णोपमा अलंकार

जिस काव्य में उपमा अलंकार के सभी अंग यानी उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, और वाचक शब्द होते है उसे ‘पूर्णोपमा अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

पीपर पात सरिस मन डोला।

2. लुप्तोपमा अलंकार

जिस काव्य में उपमा के चार अंगों में से एक और एक से अधिक अंग लुप्त होते है उसे ‘लुप्तोपमा अलंकार’ कहा जाता है।

उदाहरण:

तुम सम पुरुष न मो सम नारी।

2. रूपक अलंकार / Rupak Alankar In Hindi

जिस काव्य और कथन में उपमेय और उपमान के बिच भेद ख़तम करके एक किया जाता है उसे ‘रूपक अलंकार’ कहा जाता है। अर्थात जहा उपमेय और उपमान के बिच कोही अंतर न हो। इस अलंकार में साधारण धर्म और वाचक शब्द नहीं होते है और उपमान और उपमेय के बिच प्रायः योजक चिन्ह का इस्तेमाल होता है।

रूपक अलंकार के उदाहरण / Rupak Alankar Ke Udaharan

सिर झुका तूने नियति की मान की यह बात।
स्वयं ही मुर्झा गया तेरा हृदय-जलजात।।

उदित उदयगिरि मंच पर, रघुबर बालपतंग।
बिकसे संत सरोज सब, हरषे लोचन-भृंग।

मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।

चरण-कमल बंदों हरिराइ।

शशि-मुख पर घूंघट डाले
अंचल में दीप छिपाए।।

3. उत्प्रेक्षा अलंकार / Utpreksha Alankar In Hindi

जिस कव्य में उपमान के न होने से उपमेय को उपमान मान लिया जाता है उसे ‘उत्प्रेक्षा अलंकार’ कहा जाता है। अर्थात जिस काव्य में किसी रूप की कल्पना की जाती है और वैसे होने की संभवना प्रकट हो जाती है। इसके मुख्यतः वाचक शब्द मनो, मानो, मनु, मनहु, जानो, जनु, जन्हु, ज्यों आदि है।

उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण / Utpreksha Alankar Ke Udaharan

सोहत ओढ़े पीत पट,
स्याम सलोने गात।
मनहुं नीलमनि सैल पर,
आतप परयौ प्रभात ।

कहती हुई यो उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो,हो गए पंकज नए।।

चमाचम चंचल नयन
विच घूँघट पट छीन।
मानहु सुर सरिता विमल,
जल उछरत जुग मीन।

4. भ्रांतिमान अलंकार / Bhrantiman Alankar In Hindi

जिस काव्य में किसी समानता के कारण एक वस्तु में किसी दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाए उसे ‘भ्रांतिमान अलंकार’ कहा जाता है। जब उपमेय में उपमान का भ्रम हो जाता है वहा भ्रांतिमान अलंकार होता है।

भ्रांतिमान अलंकार के उदाहरण / Bhrantiman Alankar Ke Udaharan

पायें महावर देन को, नाइन बैठी आय,
फिरि-फिरि जानि महावरी, एड़ी भीडत आय।

चाहत चकोर सूर ऒर , दृग छोर करि।
चकवा की छाती तजि धीर धसकति है।।

पाँव महावर दें को नाइन बैठी आय।
पुनि-पुनि जानि महावरी एड़ी भीजत जाय।।

नाक का मोती अधर की कान्ति से,
बीज दाड़िम का समझकर भ्रान्ति से,
देखकर सहसा हुआ शुक मौन है,
सोचता है, अन्य शुक कौन है।

5. संदेह अलंकार / Sandeh Alankar In Hindi

जब उपमेय और उपमान में समानता होने के कारण यह निश्चय नहीं हो पाता उपमान और उपमेय अलग है या नहीं तब उसे ‘संदेह अलंकार’ कहा जाता है। जब किसी व्यक्ति और वस्तु को देखकर संदेह निर्माण होता है तब संदेह अलंकार होता है।

संदेह अलंकार के उदाहरण / Sandeh Alankar Ke Udaharan

सारी बिच नारी है कि नारी बिच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।।

कहहिं सप्रेम एक-एक पाहीं।
राम-लखन सखि होहिं की नाहीं।।

कहूँ मानवी यदि मैं तुमको तो ऐसा संकोच कहाँ?
कहूँ दानवी तो उसमें है यह लावण्य की लोच कहाँ?
वन देवी समझूँ तो वह तो होती है भोली-भाली।

6. अन्योक्ति अलंकार / Anyokti Alankar In Hindi

जहा किसी व्यक्ति को लक्ष्य करके कुछ बात कहा जाए जैसे की उपमान के बहाने का वर्णन किया जाए उसे ‘अन्योक्ति अलंकार’ कहा जाता है। अन्योक्ति का अर्थ होता है अन्य के प्रति कही गए उक्ति (बात) जब कोही बात सीधे तौर पर न कहके किसी और के सहारे कहा जाए वह अन्योक्ति अलंकार आता है।

अन्योक्ति अलंकार के उदाहरण / Anyokti Alankar Ke Udaharan

नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास इहि काल।
अली कली ही सौं बिध्यौं आगे कौन हवाल।।

केला तबहिं न चेतिया, जब ढिग लागी बेर।
अब ते चेते का भया , जब कांटन्ह लीन्हा घेर।।

इहिं आस अटक्यो रहत, अली गुलाब के मूल।
अइहैं फेरि बसंत रितु, इन डारन के मूल।।

7. विभावना अलंकार / Vibhavana Alankar In Hindi

जब किसी कारण या निश्चित वजह के अनुपस्थिति उस कार्य का होना और उत्पन्न होने का विश्लेषण किए जाए उसे ‘विभावना अलंकार’ कहा जाता है। कारण के न होते कार्य का होना वह विभावना अलंकार होता है।

विभावना अलंकार के उदाहरण / Vibhavana Alankar Ke Udaharan

बिनु पग चलै सुनै बिनु काना।
कर बिनु करम करै विधि नाना।।
आनन रहित सकल रस भोगी।
बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।

निंदक नियरे राखिए , आँगन कुटी छबाय।
बिन पानी साबुन निरमल करे स्वभाव।।

8. मानवीकरण अलंकार / Manvikaran Alankar In Hindi

जब किसी काव्य के जड़ में चेतन का आरोप होता है उसे ‘मानवीकरण अलंकार’ कहा जाता है। जहा मानवी भावनाएं और क्रियाओं का आरोप होता है वहा मानवीकरण अलंकार होता है।

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण / Manvikaran Alankar Ke Udaharan

है विखेर देती वसुंधरा मोती सबके सोने पर ,
रवि बटोर लेता उसे सदा सबेरा होने पर।

उषा सुनहले तीर बरसाती
जय लक्ष्मी- सी उदित हुई।

दिवस अवसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही
वह संध्या-सुन्दरी सी परी
धीरे-धीरे।

9. अतिशयोक्ति अलंकार / Atishyokti Alankar In Hindi

जब किसी काव्य में किसी बात को बढ़ा चढ़कर वर्णन किया जाता है उसे ‘अतिशयोक्ति अलंकार’ कहा जाता है।

अतिशयोक्ति अलंकार के उदाहरण / Atishyokti Alankar Ke Udaharan

हनुमान की पूँछ में, लगन न पायी आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।

पानी परात को हाथ छुयौ नहिं ,
नैनन के जल सों पग धोए।

आगे नदिया पड़ी अपार, घोडा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।

उभयलंकार / Ubhaya Alankar In Hindi

जिस अलंकार में शब्दलंकार और अर्थलंकार यह दोन अलंकारों की वृद्धि होती है उसे ‘उभयलंकार’ कहा जाता है। जिस अलंकार में शब्द और अर्थ यह दोनों में चमत्कार की वृद्धि होती है वहा उभयलंकार आता है।

उभयलंकार के भेद/ Ubhaya Alankar Ke Bhed In Hindi

  1. संकर (Fusion of Figures of Speech)
  2. संसृष्टि (Combination of Figures of Speech)

1. संकर (Fusion of Figures of Speech)

जिस अलंकार में दो या दो से अधिक अलंकार ‘नीर-क्षीर’ के सामान आपस में घुल-मिलकर रहते है वहा संकर अलंकार होता है।

उदाहरण:

सठ सुधरहिं सत संगति पाई। पारस-परस कुधातु सुहाई। -तुलसीदास

2. संसृष्टि (Combination of Figures of Speech)

जिस अलंकार में दो या दो से अधिक अलंकार रहते पर उनकी पहचान में कोही कठनाई नहीं होती है उसे ‘संसृष्टि अलंकार’ कहा जाता है। तिल-तंडुल-न्याय से परस्पर-निरपेक्ष अनेक अलंकारों की स्थिति ‘संसृष्टि’ अलंकार है। जैसे तिल और तंडुल (चावल) पृथक दिखाई पड़ता है उसी प्रकार संसृष्टि अलंकार मिलकर रहकर भी उनकी पहचान में कोही कठिनाई नहीं।

उदाहरण:

भूपति भवनु सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न परतर पावा।
मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।

इस पोस्ट में हमने आपको बहुत से Alankar in Hindi के बारेमे बताया। हमारी इस पोस्ट द्वारा यह कोशिश है के आपको अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण से अवगत किया जाए।

दोस्तो हम उम्मीद करते है के Alankar in Hindi / अलंकार – अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण – हिंदी व्याकरण अच्छा लगा हो। हमारी यही कोशिश है के आपको अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण के बारेमें अवगत किया जाए।

अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो कृपया ये पोस्ट अपने परिवार या मित्रो के साथ शेयर करे। ताकि उन्हें भी इसका लाभ हो। आपको Alankar in Hindi / अलंकार – अलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण – हिंदी व्याकरण के बारेमें कोई भी समस्या हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछिए। धन्यवाद HindiJunction आने के लिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here