नेटफ्लिक्स की सात-एपिसोड की सीरीज़ ब्लैक वारंट विक्रमादित्य मोटवाने और सत्यांशु सिंह द्वारा बनाई गई है और इसे अप्लॉज एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रोड्यूस किया गया है। यह शो जेलरों, कैदियों और विचाराधीन कैदियों के जीवन पर केंद्रित है और 1980 के दशक के दिल्ली की भीड़भाड़ वाली और अंडरस्टाफ़ तिहाड़ जेल को एक जेल अधीक्षक की नज़र से दिखाता है।
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ब्लैक वारंट: एक वास्तविकता से प्रेरित जेल ड्रामा |
शो का प्लॉट और कहानी
ब्लैक वारंट, अपराध और सजा पर आधारित आम कहानियों से अलग है। यह तिहाड़ जेल के एक ईमानदार, शांत स्वभाव वाले जेलर के संघर्ष की कहानी है, जो एक भ्रष्ट और असंवेदनशील व्यवस्था में काम करता है।
शो का मुख्य पात्र, जेलर सुनील गुप्ता (ज़हान कपूर द्वारा निभाया गया), एक विनम्र, सौम्य और सरल व्यक्तित्व का इंसान है। वह उन परिस्थितियों में काम कर रहा है जहां अपराधी गिरोह स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और नियमों का उल्लंघन करना आम बात है। यह शो उनके संघर्ष और दृढ़ संकल्प को दिखाता है कि कैसे वह अपनी ईमानदारी और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए इस भ्रष्ट व्यवस्था का सामना करते हैं।
मुख्य कलाकार और प्रदर्शन
- ज़हान कपूर ने सुनील गुप्ता की भूमिका निभाई है। उनके सहज और असल प्रदर्शन ने इस किरदार को गहराई दी है।
- उनके सहकर्मी जेलरों के रूप में राहुल भट, परमवीर चीमा, और अनुराग ठाकुर ने अलग-अलग व्यक्तित्व और दृष्टिकोण के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
- "बिकिनी किलर" चार्ल्स शोभराज (सिद्धांत गुप्ता) का किरदार भी शो में महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
शो 1981 से 1986 के बीच के घटनाक्रम को कवर करता है। इसमें 1970 और 1980 के दशकों की प्रमुख शहरी अपराधों और राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जैसे:
- पंजाब में उग्रवाद
- इंदिरा गांधी की हत्या
- 1984 के सिख विरोधी दंगे
शो की पटकथा सुनील गुप्ता और सुनेत्रा चौधरी की पुस्तक ब्लैक वारंट: कन्फेशन्स ऑफ़ ए तिहाड़ जेलर पर आधारित है।
समाज और न्याय प्रणाली पर नज़र
ब्लैक वारंट केवल एक जेल ड्रामा नहीं है; यह एक राष्ट्र की समस्याओं और सामाजिक असमानताओं को भी उजागर करता है।
- गरीबी, वर्ग भेद और राजनीतिक कनेक्शनों के प्रभाव को दिखाया गया है।
- जेल में होने वाले अन्याय और भ्रष्टाचार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- मौत की सजा और इसके आसपास की राजनीति को भी दर्शाया गया है।
तकनीकी पक्ष
- छायांकन: सौम्यनंदा साही ने शो को एक गहरी और यथार्थवादी बनावट दी है।
- लेखन और निर्देशन: विक्रमादित्य मोटवाने, सत्यांशु सिंह, और अर्केश अजय ने इसे सशक्त और संवेदनशील बनाया है।
समीक्षा
ब्लैक वारंट न केवल तिहाड़ जेल की कठोर वास्तविकताओं को उजागर करता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे एक ईमानदार इंसान एक भ्रष्ट और कठिन व्यवस्था में भी अपने आदर्शों पर टिका रह सकता है। यह शो एक युवा अधिकारी के संघर्षों और एक टूटे हुए सिस्टम की स्थिति को सुधारने के लिए उसकी लड़ाई का प्रतीक है।
ब्लैक वारंट एक ऐसा शो है जो देखने लायक है। यह मनोरंजन के साथ-साथ समाज और व्यवस्था की गहरी पड़ताल करता है।