भारत में जब फसल का मौसम आता है, तो दक्षिण भारत के राज्यों में पोंगल उत्सव की शुरुआत भोगी से होती है। यह चार दिवसीय पर्व का पहला दिन होता है, जिसे मुख्यतः तमिलनाडु, तेलंगाना, और कर्नाटक में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। भोगी हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है और यह संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी जैसे त्यौहारों का शुभारंभ करती है। यह दिन दिनों के बड़े होने और कृषि समृद्धि का प्रतीक है।
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भोगी: नई शुरुआत और समृद्धि का पर्व |
भोगी का इतिहास और पौराणिक महत्व
भोगी पर्व का गहरा संबंध हिंदू पौराणिक कथाओं और परंपराओं से है:
- इंद्र देव को समर्पण: यह दिन इंद्र देव को समर्पित है, जो वर्षा और कृषि समृद्धि के देवता माने जाते हैं। किसान अच्छी फसल और समय पर वर्षा के लिए उनकी प्रार्थना करते हैं।
- श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा: इसे भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है। एक कथा के अनुसार, बचपन में श्रीकृष्ण ने माखन चुराया था, जिसे बाद में "भोग" (प्रसाद) के रूप में जाना गया।
- गोवर्धन पर्वत का प्रसंग: कुछ लोग इसे उस घटना से जोड़ते हैं, जब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववालों को भारी बारिश से बचाया था।
भोगी का मुख्य संदेश सकारात्मकता की जीत, प्रकृति के साथ सामंजस्य और जीवन में नई शुरुआत है।
भोगी का महत्व
भोगी पर्व का सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व गहरा है।
परिवर्तन और पुनर्निर्माण का पर्व:
- यह दिन पुराने और अनुपयोगी वस्त्रों, वस्तुओं, और बुरी आदतों को त्यागने का संदेश देता है।
- घर और समाज में भोगी मंतालु (अग्नि प्रज्वलन) की परंपरा निभाई जाती है। यह पुराने को जलाकर नई शुरुआत करने का प्रतीक है।
किसानों के लिए विशेष दिन:
- भोगी कृषि चक्र के समापन और नई फसल की उम्मीद का प्रतीक है।
- घरों को साफ-सुथरा कर कोलम (रंगोली) से सजाया जाता है, जो चावल के आटे, फूलों और हल्दी से बनाए जाते हैं।
- परंपरागत मिठाई, जैसे पोंगल (गुड़ और दाल से बना मीठा व्यंजन), त्योहार की विशेषता है।
शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण:
- भोगी मंतालु के माध्यम से शुद्धिकरण और आध्यात्मिक नवीकरण को महत्व दिया जाता है।
भोगी पर शुभकामनाएं
भोगी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सकारात्मकता और खुशियों को बांटने का समय है। इस दिन लोग शुभकामनाएं देते हैं, जैसे:
- "भोगी का प्रकाश आपके जीवन को खुशियों और सफलता से रोशन करे।"
- "आपको भोगी की शुभकामनाएं, जो आपके जीवन में गर्मजोशी, प्रेम और समृद्धि लाए।"
- "इस भोगी पर सभी दुखों को त्यागें और सुखमय भविष्य को अपनाएं।"
यह शुभकामनाएं भोगी के नवीनता, आशा और एकता के संदेश को प्रकट करती हैं।
दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में, परिवार इस दिन प्रार्थना, भोग, और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मिलकर इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाते हैं।